
अपनी मांगों को लेकर एक आशा कार्यकर्ता ने शिक्षा विभाग पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया,,, जबकि वास्तव में कहीं ना कहीं देखा जाए तो आशा बहनजी का कहना भी सही साबित हो रहा है । क्योंकि सरकारी स्कूलों में शासन की सुविधाओ के बाबजूद भी शिक्षा का स्तर दिन पर दिन गिरता चला जा रहा है । आशाओ का कहना है कि शिक्षा विभाग को एक ऐसी गाइडलाइन जारी करना चाहिए जिसमे सभी शासकीय कर्मचारियो के बच्चे शासकीय विद्यालयों में ही अध्ययन करना चाहिए। ताकि समानता का अधिकार व शिक्षा के क्षेत्र में सुधार हो सके, क्योंकि अधिकतर देखा गया है कि सरकारी विद्यालय में शिक्षा देने वाले शिक्षक ही अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ना ज्यादा पसंद कर रहे हैं क्यों,,,,। क्या उन्हें विश्वास है की वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा नहीं दिला पाएंगे,,,
फिर यह दिखावा क्यों,,,,,,

