

पुराने बस स्टेंड में भागवत कथा*
सिहोरा– पुराना बस स्टेंड गणपति ट्रेडर्स में चल रही सप्त दिवसीय भागवत कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ से संतब्रम्हानन्द दास जी महाराज ने सुदामा चरित्र की मीमांसा करते कहा कि श्रीकृष्ण सुदामा की दोस्ती जगत के लिएएक मिसाल है जिसमें कोई स्वार्थ नहीं केवल प्रेम है तभी तो भगवान ने अपनी भाभी सुदामा की पत्नी के द्वारा भेजेगये चावल में से पहली मुट्ठी खाते ही स्वर्ग सुदामा के नाम कर दिया, दुसरी मुट्ठी में मित्र को प्रथ्वी लोक का वैभव देदिया जैसे ही भगवान तीसरी मुट्ठी खाने लगे तो उन्हें माता लक्ष्मी ने रोक दिया नहीं तो वे बैकुंठ भी सुदामा को देदेते। कृष्ण एक राजपरिवार में और सुदामा ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए थे पर दोनों की मित्रता का गुणगान पूरीदुनिया करती थी। शिक्षा दीक्षा समाप्त होने के बाद भगवान राजा बन गये तो वहीं दुसरी तरफ सुदामा के बुरे दिनकी शुरुआत हो चुकी थी। और बुरे दिन से परेशान होकर ही सुदामा की पत्नी ने उन्हें कृष्ण से मिलने जाने के लिएकहा था। संत जी कहा वैसे तो भगवान की 16108 पत्नियां थीं लेकिन उनमें श्रीकृष्ण की 8 पटरानियां थीं. जिनसेउन्होंने स्वयं विवाह किया उनमें रुकमणि पहली थीं उनके अलावा जाम्बवन्ती,सत्यभामा,कालिन्दी, मित्रबिन्दा,सत्या,भद्रा और लक्ष्मणा भी श्रीकृष्ण की पत्नियां थी। भगवान ने सुदामा के साथ ईश्वरीय व्यवहारकरने के लिए अपने हाथों से उनके पैर धोये थे। सुदामा अपने मित्र कृष्ण द्वारा ऐसा अप्रत्याशित शाही व्यवहारदेखकर रो पड़े।
भगवान की गुरुकुल में सुदामा से मित्रता हुई थी और सुदामा का विवाह सुशीला नाम की कन्या से हुआ उनकीहालत भजन के प्रभाव से जीर्ण–शीर्ण हो गई थी लेकिन वे दरिद्र नहीं थे। सम्पत्ति नहीं बल्कि जीवन में आत्म संतोषसुख का कारण है। व्यक्ति संपन्नता से नहीं बल्कि श्रेष्ठ आचरण से संपन्न होता हैं। कथा के पूर्व बहोरीबंदविधायक प्रणय प्रभात पांडे,श्याम शुक्ला,सुरेन्द्र मिश्रा, श्रीमती रश्मि मनेन्द्र अग्निहोत्री,अंकित तिवारी, अनुपमसराफ, मयंक जैन,द्रोपदी गुप्ता,प्रशांत रश्मि गुप्ता,आशीष नीतू गुप्ता,अभिषेक सोम्या गुप्ता,भरत रेखा गुप्ता
कृष्ण नारायण मंजू देवी गुप्ता, पारस सुनीता देवी गुप्ता आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया।
🖋️कटनी से ब्यूरो चीफ पारस गुप्ता की रिपोर्ट


