




बहोरीबंद भगवान आदि कुमार छै माह पश्चात आहार के लिए निकले राजा सौम और राजा श्रेयांश ने इच्छु रस काआहार नवदा भक्ति पूर्वक पडगाहन के पश्चात दिए तभी से आज तक दान तीर्थ का प्रवर्तन निरंतर चल रहा है श्रवणोको श्रावको द्वारा आहार दान की प्रक्रिया वर्तमान में आदिनाथ के काल से आज भी निरंतर प्रवाहमान है साधुओं केरत्नत्रय के पालन में ग्रहस्तों द्वारा तप वृद्धि हेतु आहार दान दिया जाता है
पंचकल्याणक के चतुर्थ दिवस आहार की चर्या विधि नायक भगवान पर की गई आदिनाथ द्वारा असी मसी कृषि विद्याशिल्प वाणिज्य आदि 72 कलाओं का उपदेश प्रजा को दिया गया अंक और अक्षर विद्या का प्रारंभ ब्राह्मी और सुंदरी कोदेकर किया गया आदि कुमार आहार के पश्चात वन गमन कर गए जहां घनघोर तप करते हुए आत्म ज्ञान को प्राप्त हुएयह आत्मज्ञान केवल ज्ञान का रूप धारण कर मोक्ष प्राप्त कराएगा प्रतिष्ठा महोत्सव में सभी क्रियाएं जन समुदाय केमध्य की गई
उक्त आशय के सारगर्भित उद्गार मुनिपुंगव सुधासागर जी मुनि श्री प्रसाद सागर जी ससंघ के सानिद्ध मे भगवान के ज्ञानकल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर विशाल धर्मसमा मे व्यक्त किये ज्ञान कल्याणकया दिवस पर प्रातःमंदिर कीप्रांगण मेंचल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव कार्यक्रम में .भगवान का अभिषेक शांति धारा पूजन एवं भगवान कीआहारचार्य पडगाहन आदि के कार्यक्रम शांनंद संपन्न किए गए


