
काँग्रेस जिसने कभी साठ वर्षों से अधिक देश पर राज किया आज भारतीय राजनीति के पृष्ठ पर लगभग हाशिये पर है …
वर्तमान में प्रदेश में शहर की सरकार बनने जा रही है ऐसे में हमारा विश्लेषण है कि पार्षद प्रत्याशी तो ठीक , पार्टी विथ डिफरेंट कहलाई जाने वाली बी जे पी बुरी तरह से पिछड़ती नज़र आ रही है ..
बात करें मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी कहलाए जाने वाले इंदौर शहर की तो तेज़ी से लोकप्रिय होते जा रहे काँग्रेस विधायक संजय शुक्ला को काँग्रेस ने साल भर पहले ही अपना प्रत्याशी बना दिया था ।
आज स्थिति ये है कि संजय शुक्ला बीते महीने से ही संजीदगी और प्रभावशाली तरीके से जनसम्पर्क में जुटे हैं ।इंदौर का मतदाता भी इस प्रभावी चेहरे को आशीर्वाद देने के लिए आतुर नज़र आ रहा है ।
अब बात करें बी जे पी की तो पार्टी ब्राह्मण नेता और हज़ारों मतों से विधानसभा जीतने वाले रमेश मेंदोला की तो आए दिनों के नए नए नियम निकालते हुए इस टक्कर देने वाले नेता को यहाँ फिर से गला दिया ।
विगत कई वर्षों से चुनाव के मौकों पर काँग्रेस से अव्वल रहने वाली बी जे पी इसी उहापोह में है कि किसे मैदान में उतारा जाए ?
खबर लिखे जाने तक सूत्र डॉक्टर निशांत खरे को अपना प्रत्याशी घोषित करने का मन बना चुके हैं । फिर भी पार्टी विथ डिफरेंट एन वक्त पर क्या कर गुजरे अभी तो यह बात भविष्य गर्भ में है ।
कहीं न कहीं मधु वर्मा और जीतू जिराती भी पार्टी से आस लगाए बैठे है ।
हाल ही में आर एस एस का पुराना राग अलापते हुए संघ से एक विस्मयकारी नाम सामने आया यह नाम है मनोज द्विवेदी का । पेशे से वकील , जज बनते बनते रह गए मनोज द्विवेदी का नाम उछलने से मतदाता पूछने लगे हैं कि यह मनोज द्विवेदी है कौन ??
और अब एक ओर विस्मयकारी नाम डॉक्टर निशांत खरे का उभर कर आया है । भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने संकेत ही संकेत में कई बात कह डाली । किंतु फिर से कहेंगे कि भाजपा प्रयोगधर्मी पार्टी बन चुकी है ..
बहरहाल ऊँट किस करवट बैठता है यह तो वक़्त बताएगा ।


