Tuesday, Sep 22, 2026
Rajneeti News India
Image default
धर्म

Navratri 2021 Day 3: नवरात्र के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की अराधना, जानिए क्या है पूजा विधि और आरती

मां दुर्गा की अराधना के महापर्व नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। माता के भक्त इस दिन विधि- विधान से मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं। चंद्रघंटा माता का वाहन सिंह है। उनकी दस भुजाएं हैं। मां के चार हाथ में कमल का फूल, धनुष और जाप माल और तीर है। बाकि के हाथों में त्रिशूल, गदा, कमंडल और तलवार हैं। माता का पांचवा हाथ अभय मुद्रा में रहता है, जिससे वो अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। मां चंद्रघंटा के माथे पर घंटे के रूप में अर्धचंद्र सुशोभित है। इससे उनके चेहरे के तेज को बढ़ता है और इसलिए इन्हें मां चंद्रघंटा कहा जाता है।

क्या है पूजा का मुहूर्त

आज के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 3 बजे से पहले तक है। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। चैत्र शुक्ल पक्ष तिथि को मां चंद्रघंटा की विधि- विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

क्या पूजा करने का तरीका

सुबह उठकर नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें। अब मां चंद्रघंटा की प्रतिमा और फोटो को एक चौकी पर रखें। विधि- विधान के साथ माता की पूजा शुरू करें। माता को सिंदूर, अक्षत, धूप दीप, पूष्प और दूध से बनी हुई मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद मां चंद्रघंटा की अराधना के लिए ऊं देवी चंद्रघंटायै नम: का जाप करें। इसके दुर्गा चालीसा और दुर्गा आरती का पाठ कर सकते हैं।

मां चंद्रघंटा की आरती

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।

पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।

चंद्र समान तुम शीतल दाती।

चंद्र तेज किरणों में समाती।

क्रोध को शांत करने वाली।

मीठे बोल सिखाने वाली।

मन की मालक मन भाती हो।

चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।

सुंदर भाव को लाने वाली।

हर संकट मे बचाने वाली।

हर बुधवार जो तुझे ध्याये।

श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।

सन्मुख घी की ज्योति जलाएं।

शीश झुका कहे मन की बाता।

पूर्ण आस करो जगदाता।

कांचीपुर स्थान तुम्हारा।

करनाटिका में मान तुम्हारा।

नाम तेरा रटूं महारानी।

भक्त की रक्षा करो भवानी।

Related posts

कुंभ के दूसरे शाही स्नान पर हरिद्वार में उमड़े लाखों श्रद्धालु, लगाई गंगा में डुबकी

News Team

Char Dham Yatra Suspended: चार धाम यात्रा पर कोरोना वायरस की मार, उत्तराखंड सरकार ने किया रद्द

News Team

नरक चतुर्दशी: पारंपरिक त्योहार का महत्व

News Team