धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों के तेवर तीखे रहे। भारतीय संस्कृति और बेटियों की रक्षा से जोड़कर सभी सदस्यों ने पुरजोर तरीके से अपनी बात रखी। कांग्रेस विधायकों की चर्चा इसे संविधान विरोधी और अल्पसंख्यक वर्ग को डराने के लिए कानून पर आधारित रही।
इस पर भाजपा की ओर से कहा गया कि यदि मंशा गलत नहीं है तो किसी को डरने की जरूरत क्या है। अपने-अपने धर्म का पालन करने के लिए सभी स्वतंत्र हैं। विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा की ओर से यह सुझाव भी दिया गया कि इसमें शिकायत करने का अधिकार सामाजिक संस्थानों को देने का प्रविधान भी किया जाना चाहिए।
धर्म स्वतंत्रता विधेयक पर विधानसभा सदस्यों ने यह कहा
सरकार शिगुफे छोड़ने का काम कर रही है। इस कानून से किसी का हित नहीं होने वाला है। अल्पसंख्यक वर्ग का जीना दूभर हो जाएगा। पहले से कानून में ऐसे अपराधों के लिए सजा के प्रविधान हैं। विधेयक में एक ही अपराध के लिए अलग-अलग वर्ग के लिए अलग-अलग सजा रखी गई है। यह समान होनी चाहिए। जिसे जेल हो गई हो, वह किस प्रकार खुद को निर्दोष साबित करेगा। यह विधेयक अल्पसंख्यक समाज को धमकाने और भयभीत करने की मंशा से लाया गया है। वाहवाही लूटने का प्रयास मात्र है। भाजपा सरकार अल्पसंख्यकों को प्रदेश से भगाने का प्रयास कर रही है। यह संविधान का उल्लंघन है। हां, मतांतरण के बाद बच्चे को पिता की संपत्ति में अधिकार देने का मैं समर्थन करता हूं। बाकी का कांग्रेस विरोध करती है।


