Tuesday, Sep 22, 2026
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धर्म

माँ ब्रह्मचारिणी (द्वितीय दिन नवरात्रि)

नव दुर्गा देवी माँ के दूसरे स्वरूप के रूप में माँ ब्रह्मचारिणी का स्थान दिया गया हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली । इस प्रकार ‘ब्रह्मचारिणी‘ का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली।

भारतीय संस्‍कृति की हिन्‍दु मान्‍यता के अनुसार मां दुर्गा का ब्रह्मचारिणी रूप, हिमालय और मैना की पुत्री हैं, जिन्‍होंने भगवान नारद के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठिन तपस्‍या की, जिससे खुश होकर ब्रह्मा जी ने इन्‍हे मनोवांछित वरदान दिया जिसके प्रभाव से ये भगवान शिव की पत्‍नी बनीं।

ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है। मां के दाहिने हाथ में जप की माला है और बायें हाथ में कमण्डल है तथा मान्‍यता ये है कि माता ब्रह्मचारिणी की पूजा और साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। साधक आज के दिन अधिष्ठान-चक्र पर ध्यान करें।

माँ ब्रह्मचारिणी देवी मंत्र:-

या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता |

नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तसयै नमो नम: |

अर्थ:हे मां! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।

ध्यान मंत्र :
वन्दे वांच्छितलाभायचन्द्रर्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलुधराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णास्वाधिष्ठानास्थितांद्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
धवल परिधानांब्रह्मरूपांपुष्पालंकारभूषिताम्॥
पद्मवंदनापल्लवाराधराकातंकपोलांपीन पयोधराम्।
कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखीनिम्न नाभि नितम्बनीम्॥

स्तोत्र मंत्र :
तपश्चारिणीत्वंहितापत्रयनिवारिणीम्।
ब्रह्मरूपधराब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
नवचक्रभेदनी त्वंहिनवऐश्वर्यप्रदायनीम्।
धनदासुखदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
शंकरप्रियात्वंहिभुक्ति-मुक्ति दायिनी।
शान्तिदामानदा,ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्।


कवच मंत्र :
त्रिपुरा में हृदयेपातुललाटेपातुशंकरभामिनी।
अर्पणासदापातुनेत्रोअर्धरोचकपोलो॥
पंचदशीकण्ठेपातुमध्यदेशेपातुमहेश्वरी॥
षोडशीसदापातुनाभोगृहोचपादयो।
अंग प्रत्यंग सतत पातुब्रह्मचारिणी॥


आरती देवी ब्रह्माचारिणी जी की

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।

ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।

जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता।

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए।

कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने।

जो तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला ले कर।

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

आलस छोड़ करे गुणगाना।

मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।

पूर्ण करो सब मेरे काम।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।

रखना लाज मेरी महतारी।

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