Thursday, Apr 16, 2026
Rajneeti News India
धर्म

जय रणजीत जय श्रीकृष्ण

हरि ऊँ तत् सत्
गीतोपनिषद्
श्रीमद् भगवद् गीता
यथारूप
अध्याय दो
गीता का सार

सुखदु:खे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि।
।। २.३८ ।।
श्रीकृष्ण जी कहते हैं कि–हे अर्जुन! तुम सुख या दुख, हानि या लाभ, विजय या पराजय का विचार किये बिना युद्ध के लिए युद्ध करो।ऐसा करने पर तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा।
भरोसा
नई सोच नई उड़ान

  • श्री भगवान् उवाच *

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