Tuesday, Sep 22, 2026
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?”नानक नन्हें बने रहो,
जैसे नन्हीं दूब ।
“बड़े-बड़े बही जात हैं,
दूब खूब की खूब ।।?
भावार्थः श्री गुरुनानक देव जी
कहते हैं कि “झुक कर चलने
वालों का कोई कुछ नहीं बिगड़
पाता जैसे सैलाब आने पर दूब
(घास) लेट जाती है और सैलाब
ऊपर से निकल जाता है।जिससे
दूब तो और बढ़ जाती है लेकिन
न झुकने वाले बड़े-बड़े पेड़….
सैलाब में बह जाते हैं …पया!!
?तू झुक के चल बंदया,
झुकयां नूं राम मिलदा !!??”नानक नन्हें बने रहो,
जैसे नन्हीं दूब ।
“बड़े-बड़े बही जात हैं,
दूब खूब की खूब ।।?
भावार्थः श्री गुरुनानक देव जी
कहते हैं कि “झुक कर चलने
वालों का कोई कुछ नहीं बिगड़
पाता जैसे सैलाब आने पर दूब
(घास) लेट जाती है और सैलाब
ऊपर से निकल जाता है।जिससे
दूब तो और बढ़ जाती है लेकिन
न झुकने वाले बड़े-बड़े पेड़….
सैलाब में बह जाते हैं …पया!!
?तू झुक के चल बंदया,
झुकयां नूं राम मिलदा !!?

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