संविधान निर्माता डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर जन्म नगर मे सैन्य प्रशासन द्वारा रास्ता बन्द आम नागरिकों के अधिकारों का हनन कर संविधान निर्माता का अपमान किया जा रहा है शहर के जागरूक पत्रकारों के समर्थन मे अम्बेडकर अनुयाई करेंगे आंदोलन जहां देश का गौरव बढ़ाने वाली हमारी सेना के जवानो को देश का हर नागरिक आदर भाव से सर्वच सम्मान देता है महू छावनी मे निवास करने वाले नागरिक अपने आपको ख़ुश नसीब समझते है और गर्व से कहते है की हम सैन्य छावनी मे निवास करते है यहां के आम लोग बच्चों को भी सेना का वैभव दिखाकर देश की सेवा के लिये प्रेरित किया जाता है लेकिन महू के लोगो को तब अपमानित होना पड़ता है ज़ब यह लोग परिवार के साथ सैन्य छेत्र से लगे आम रास्तो से गुजरते है तो आम लोगो का सारा भर्म टूट जाता है बड़ी पीड़ा के साथ उन्हें अपने सिविलियन होने का एहसास होता है क्या वे वर्षो पुराने अपने आम रास्तो से भी गुजरने के हकदार नहीं है ज़ब चाहे रास्ते बन्द करना संविधान द्वारा दिए गय वोट के अधिकार छीन लेना ये कहा का इंसाफ है आम जनता को बिना कोई सुचना के रास्ते बन्द कर खतरनाक कंटीले तार बिछा दिए जाते है कोरोना महामारी के चलते आम नागरिकों पर आर्थिक भार पड़ा है और सैन्य प्रशासन ने आम नागरिकों पर रास्ते बन्द कर और आर्थिक बोझ डाल दिया है अगर आपको धारनाका महूगांव तेलीखेड़ा से शहर मे जाना है तो एक रास्ता अम्बेडकर स्मारक राम मंदिर (आम रास्ता बन्द है मोटर साईकिल के लिये )अब शहर मे जाना है तो आपको कब्रस्तान नाके से शहर मे आना पड़ता है दूसरा रास्ता पहले स्टेशन हेडकुवाटर तार ऑफिस से शॉर्ट कट शहर पहुंच जाते थे अब पुराने पेट्रोल पम्प से शहर जाना पड़ता है जो काफ़ी लम्बा पड़ता है समय के साथ आर्थिक बोझ भी डालता है शहर से डॉ अम्बेडकर जन्मभूमि स्मारक पर हजारों श्रद्धालु जाते है लेकिन अम्बेडकर स्मारक और धारनाका जाने वाले मार्ग केंद्रीय विद्यालय स्वर्ग मंदिर यह रास्ते गेट लगाकर स्थाई रूप से बन्द कर दिए है बचा 72 माल रोड जहां बगैर हेलमेट जाने नहीं दिया जाता ज़बकी इन रास्तो पर पवित्र मंदिरो के साथ पार्थ इंडिया का कार्यलय भी है वही शहर के सबसे पुराने रास्ते जो तार ऑफिस से पेंशन पूरा गोशाला तेलीखेड़ा धारनाका महूगांव जाने का था वो भी बन्द कर दिया यह बड़ी शर्म की बात है संविधान निर्माता की जन्मभूमि मे आजाद भारत के नागरिकों को सैन्य प्रशासन की कार्य प्रणाली आम नागरिकों गुलामी का एहसास करती है यह आम नागरिकों का अपमान नहीं यह संविधान निर्माता का अपमान है उक्त तानाशाही के विरोध मे अम्बेडकर अनुयाई जल्द आंदोलन शुरू करेंगे
previous post
next post

