इस बार दहन का मुहूर्त शाम सात बजे से लेकर अर्द्धरात्रि 12 बजे तक होगा। फागुन के अंतिम दिन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर रविवार को होलिका दहन होगा। पूर्णिमा तिथि देर रात 2ः28 बजे लग रही है जो 28 की देर रात 12ः39 बजे तक रहेगी। शास्त्रीय मान्यता अनुसार प्रतिपदा, चतुर्दशी, दिन और भद्रा में होलिका दहन त्याज्य है। आमतौर पर हर पूर्णिमा को भद्रा होती है, उसके बाद ही होलिका दहन किया जाता है। इस बार भद्रा रविवार को दिन में 1ः33 बजे ही खत्म हो जा रही है। ज्योतिषी पं. ऋषि द्विवेदी बताते हैं कि होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को किया जाता है। इसके साथ ही होलाष्टक संपन्न हो जाएगा। दूसरे दिन सोमवार को चैत्र मास कृष्णपक्ष प्रतिपदा को धुरड्डी यानी रंगोत्सव मनाया जाएगा। होलिका दहन के बारे में कहा गया है- ‘निशामुखे प्रदोषे’। प्रदोष काल सूर्यास्त के 48 मिनट के बाद तक होता है। चूंकि रविवार को सूर्यास्त 6ः11 बजे हो रहा है, इसलिए प्रदोष काल 6ः59 बजे तक रहेगा, इसलिए होलिका दहन पूर्णिमा रात रविवार को शाम सात बजे लेकर 12ः39 बजे तक किया जा सकता है। वह बताते हैं कि होलिका दहन का सबसे अच्छा समय रात नौ से 11 बजे तक है। इस दिन ढूंढा राक्षसी का ओम होलिकाये नमः जाप के साथ विधिवत पूजन किया जाता है।


