@ शैलेन्द्र सिंह
इंदौर। महापौर का पद आरक्षण मुक्त होते ही भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे एक बार फिर सक्रिय हो गए है, इंदौर में तो वे विभिन्न मौकों पर सक्रिय है, लेकिन राजधानी भोपाल में भी उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है, वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा सहित संगठन के शीर्ष नेताओं व मंत्रियों से मिलने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे है। ऊपरी तौर पर भले ही शहर हित से जुड़े विषयों पर उनकी मुलाकात हो रही है, पर इसके मूल में महापौर प्रत्याशी की संभावनाएं ही है, एक तरह से वे अपने चुनिंदा समर्थकों के साथ शहर का प्रथम नागरिक बनने के अवसर टटोलने बार-बार राजधानी जा रहे है।
2009 में वे संभागीय चयन समिति में शामिल थे, लेकिन किसी सर्वमान्य नाम पर सहमति नहीं बनने पर तब भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें ही महापौर प्रत्याशी घोषित कर दिया था, एक तरह से अंपायर ही खिलाड़ी की भूमिका में हो गए थे, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के पंकज संघवी को कड़े मुकाबले में करीब 11 हजार मतों से पराजित किया था, मोघे की जीत के लिए भाजपा को तब जमकर पसीना बहाना पड़ा था। हालांकि इस बार भाजपा की संभावनाएं पहले से बेहतर है और माना जा रहा है कि कोई भी प्रत्याशी हो, बड़ी विजय तय है। इस कारण से भी मोघे और सक्रिय हो गए है, क्योंकि टिकट मिलना ही जीत की गारंटी दिखाई दे रही है, और पूर्व में महापौर रहने पर अब शहर में पहचान का संकट भी नहीं रहा है। हालांकि इस बार उम्र का बन्धन उनके आड़े आ सकता है, फिर उनके महापौर कार्यकाल से भाजपा के ही कई पार्षद खुश नहीं थे, तब कई ने उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक तौर पर आवाज भी उठाई थी। मोघे अविभाजित मप्र में भाजपा के संगठन महामंत्री व खरगोन लोकसभा से सांसद भी रहे है।
विष्णुदत्त, सुहास सहित मंत्री मिश्रा, सिंह व सारंग से की चर्चा
इसी क्रम में मोघे ने मंगलवार को भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा व संगठन महामंत्री सुहास भगत से मुलाकात कर संगठनात्मक विषयों पर चर्चा की, प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एवं नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह से भी उन्होंने मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मोघे ने शहर में एमवाय सहित अनेक हॉस्पिटलों में चल रहे इलाज व अन्य व्यवस्थाओं पर सुझाव दिए। गृह मंत्री से उन्होंने गुंडा तत्वों के खिलाफ चल रही कार्यवाही की सराहना भी की। आगामी नगर निगम चुनाव व मिलावटखोरो के खिलाफ मुहिम के संबंध में मंत्री सिंह को कुछ जरूरी सुझाव भी दिए। प्रदेश सरकार के सख्त कदमों व निर्णयों की भी उन्होंने सराहना की। उनके साथ कुछ चुनिंदा समर्थक भी मौजूद थे।
■ सुमित मिश्रा की पीड़ा,
पार्टी के लिए शुभ संकेत
भाजपा नेता सुमित मिश्रा ने पिछले दिनों सोशल मीडिया के माध्यम से काम नहीं मिलने की पीड़ा व्यक्त की थी, जो बाद में सुर्खियां में बन गयी थी। मिश्रा का कहना था कि संगठन पिछले 4 साल से उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दे रहा है, जबकि वे पार्टी के लिए हमेशा तैयार रहते है, उन्हें किसी काम लायक नहीं समझा जा रहा है। मिश्रा की इस पीड़ा को संगठन ने सकरात्मक लिया है, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि ये संगठन के लिए शुभ संकेत है, एक समय पार्टी को काम करने के लिए कार्यकर्ता नहीं मिलते थे और आज काम नहीं मिलने पर पीड़ा भी व्यक्त कर रहे है। हालांकि इनका तर्क है कि मिश्रा को अपनी बात पार्टी फोरम पर कहना थी, वैसे सोशल मीडिया पर भी उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर किसी को दोषी नहीं ठहराया है। इनकी माने तो मिश्रा योग्य कार्यकर्ता है, पार्टी ने कई अवसरों पर उनका उपयोग किया है, वे भाजपा के नगर उपाध्यक्ष है, सांवेर उपचुनाव में भी उन्हें जिम्मेदारी दी गयी थी, पार्टी के कई आयोजन में भी वे मंच पर सक्रिय रहते है। प्रशिक्षण वर्ग की भी कई कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी है और ये अभी भी जारी है।।

