दिनेश निगम ‘त्यागी’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ नेता प्रतिपक्ष पद के लिए आदिवासी कार्ड चलने की तैयारी में थे। उन्होंने अपने खास वरिष्ठ आदिवासी विधायक बाला बच्चन का नाम आगे किया था। खबर थी , बच्चन का नाम इस पद के लिए लगभग तय हो गया है। बस नाम का ऐलान शेष है। डा. गोविंद सिंह विधानसभा में सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं लेकिन आदिवासी कार्ड की वजह से उनका नाम पीछे चला गया था। कमलनाथ के जवाब में वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने युकां प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में आदिवासी कार्ड खेला। उन्होंने अपने कट्टर समर्थक पूर्व मंत्री कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया का समर्थन किया। उनके समर्थन के लिए कमलनाथ को भी राजी कर लिया। विक्रांत बड़े अंतर से चुनाव जीत गए। उनके प्रदेश अध्यक्ष बनते ही एक तीर से कई निशाने सध गए। अब दिग्विजय के दोनों हाथों में लड्डू हैं।
0 नेता प्रतिपक्ष के लिए डा. सिंह का रास्ता साफ
- युकां चुनाव से दिग्विजय सिंह को पहला फायदा यह हुआ कि वे अपने कट्टर समर्थक कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत को सक्रिय राजनीति में लाने में सफल रहे। जबकि विक्रांत ने युवक कांग्रेस के सदस्यता अभियान तक में हिस्सा नहीं लिया था। दूसरा, कमलनाथ ने नेता प्रतिपक्ष के लिए आदिवासी कार्ड चलकर बाला बच्चन का नाम आगे किया था। यह दावा कमजोर हुआ और दिग्विजय के दूसरे कट्टर समर्थक डा. गोविंद सिंह नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में फिर सबसे आगे हो गए। डॉ सिंह अनुभवी, वरिष्ठ तो हैं ही, कभी विधानसभा का चुनाव भी नहीं हारे। वे चंबल-ग्वालियर अंचल से हैं, यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद संगठन को मजबूत करने की ज्यादा जरूरत है। हालांकि कमलनाथ खेमा दलित कार्ड चलकर सज्जन सिंह वर्मा का नाम आगे करने की तैयारी में जुट गया है।
0 प्रदेश अध्यक्ष के लिए ओबीसी कार्ड की तैयारी - पर्दे के पीछे से ही सही लेकिन विधानसभा चुनावों से दिग्विजय सिंह प्रदेश की राजनीति में खासे सक्रिय हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद उनका रास्ता और साफ हो गया है, क्योंकि प्रदेश में कमलनाथ का नेटवर्क दिग्विजय सिंह जैसा मजबूत नहीं है। अब जब भी कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ेंगे तो दिग्विजय सिंह ओबीसी कार्ड खेल सकते हैं। संभावना किसी युवा को कमान सौंपने की है। ऐसे में जीतू पटवारी एवं अरुण यादव में से किसी को मौका मिल सकता है। वैसे भी माना जा रहा है कि अरुण यादव की मेहनत की बदौलत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीती लेकिन बाद में उन्हें पीछे धकेल दिया गया। दिग्विजय सामान्य वर्ग से पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का नाम भी आगे बढ़ा सकते हैं। अजय सिंह प्रदेश अध्यक्ष पद के सबसे प्रबल दावेदार हैं लेकिन यदि डॉ सिंह नेता प्रतिपक्ष बने तो उनका दावा कमजोर हो जाएगा।
0 युवाओं में नेटवर्क बढ़ाने की होगी कोशिश

