यह एक बड़ा विचारणिय विषय है, गुंडा पनप कैसे जाता है। जबकि लॉ एंड ऑर्डर है, पुलिस है, प्रशासन है, नेता है अब इनमें से कोई न कोई असामाजिक व्यवहार करते हुए गुंडे को सपोर्ट दे देते हैं और वह कैंसर के रूप में समाज मे फैल रहे है। उदाहरण से रिकॉर्ड भरे हैं, नेता इन लोगों को अपने पठ्ठे के रूप में रखकर इनका बहुत सपोर्ट करते है। पहले लोग गुंडे को सुरक्षा के लिए रखते थे, अब गुंडे लोगो से सुरक्षा देने का हफ्ता लेने लगे। ताज्जुब इस बात का है कि पुलिस का इतना बड़ा मुखबरी का नेटवर्क है पर उन्हें कोई बड़े हादसे होने के बाद ही पता पड़ता है कि इसके पीछे फलाॅ गुंडा है। बस यही शंका उत्पन्न होने लगती है। कहने का मतलब यह नहीं कि पुलिस भ्रष्ट है, मतलब यह है कि कहीं ना कहीं यह उनकी चूक है। मीडिया मे भी ऐसे लोगों के बड़े-बड़े विज्ञापन छपते हैं उनके जन्मदिन के उनके पॉलिटिकल नियुक्तियों पर। उम्मीद हे एक दिन ऐसा आएगा जब कोई गुंडा पनप ही नहीं पाएगा

