ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास हमारी ताकत होती है। ईश्वर को किसी ने देखा नहीं है और कौन-कौन ईश्वर है हमें यह भी नहीं मालूम पर हां हर मजहब के लिए ईश्वर खुदा यीशु गाॅड है। कई लोग भगवान से कहते हैं, हे ईश्वर बस दाल रोटी चलती रहे ईश्वर सोचते है कि इसके प्रारब्ध में हलवा पुरी खाना लिखा है और यह दाल रोटी मांग रहा है यहाॅ ईश्वर कंफ्यूज हो जाते है। मेरा मानना है ईश्वर सीधे तौर पर आपको कुछ देता नहीं है। उदाहरण एक तरफ पुलिस काली मां की घंटी बजाते हुए तिलक लगाकर कहता है कि आज तो डाकू पकड़ लूंगा और वहीं दूसरी तरफ डाकू भी काली मां की घंटी बजाकर तिलक लगाकर कहता है कि आज तो डाका डालूंगा। यहां अकर मालूम पड़ता है कि ईश्वर का आशीर्वाद उसी के साथ होता है जो अपने सोच और कर्मों में माहिर होगा वह जीतेगा। इसीलिए कहते हैं अच्छा सोचा अच्छा करो। ईश्वर का प्रिय भी वही होता है जो अच्छा सोचता और अच्छा करता है। ईश्वर से जब भी कुछ बात करो कुछ मांगो तो हमेशा भरपूर मांगो तभी आपको भरपूर विश्वास मिले और आप सफल हों।
अशोक मेहता, वास्तु एवं पर्यावरणविद्, इंदौर

