Sunday, Jun 7, 2026
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धर्म

दूसरा नवरात्र, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से प्राप्‍त होता है धैर्य और सहनशीलता

आज नवरात्र का दूसरा दिन है और आज का दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। जैसा कि मां के नाम में ही शोभित है, ब्रह्मचारिणी यानी कि ब्रह्मचर्य का पालन करने वाली देवी। मां ब्रह्मचारिणी के हाथों में अक्षमाला और कमंडल सुसज्जित हैं। मां यह स्‍वरूप आपको ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए प्रेरित करता है। मान्‍यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की सच्‍चे मन से पूजा करने से भक्‍त को सदाचार, एकाग्रता, धैर्य, संयम और सहनशीलता प्राप्‍त होती है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजाविधि, मंत्र, भोग और महत्‍व।

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?”नानक नन्हें बने रहो,
जैसे नन्हीं दूब ।
“बड़े-बड़े बही जात हैं,
दूब खूब की खूब ।।?
भावार्थः श्री गुरुनानक देव जी
कहते हैं कि “झुक कर चलने
वालों का कोई कुछ नहीं बिगड़
पाता जैसे सैलाब आने पर दूब
(घास) लेट जाती है और सैलाब
ऊपर से निकल जाता है।जिससे
दूब तो और बढ़ जाती है लेकिन
न झुकने वाले बड़े-बड़े पेड़….
सैलाब में बह जाते हैं …पया!!
?तू झुक के चल बंदया,
झुकयां नूं राम मिलदा !!??”नानक नन्हें बने रहो,
जैसे नन्हीं दूब ।
“बड़े-बड़े बही जात हैं,
दूब खूब की खूब ।।?
भावार्थः श्री गुरुनानक देव जी
कहते हैं कि “झुक कर चलने
वालों का कोई कुछ नहीं बिगड़
पाता जैसे सैलाब आने पर दूब
(घास) लेट जाती है और सैलाब
ऊपर से निकल जाता है।जिससे
दूब तो और बढ़ जाती है लेकिन
न झुकने वाले बड़े-बड़े पेड़….
सैलाब में बह जाते हैं …पया!!
?तू झुक के चल बंदया,
झुकयां नूं राम मिलदा !!?

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